Marathi Kavita – Ek Naate

एक नात…
कितीही ठरवलं तरी,
तुझ्यावर रूसून राहता येत नाही.
उघड्या डोळ्यांनी तुला टाळलं तरी,
मिटल्यावर त्यांना तुझ्याशिवाय पर्यायच उरत नाही…

सगळं तुला देऊन पुन्हा,
माझी ओंजळ भरलेली.
पाहिलं तर तू तुझी ओंजळ,
माझ्याच ओंजळीत धरलेली…

डोळ्यातून अश्रू ओघळला,
की तोही आपला राहत नाही.
वाईट याचंच वाटतं की,
दुःख त्याच्या सोबत वाहत नाही…

आपण ज्याला आवडतो,
त्याच आपण होऊऩ जाव.
नाहितर आपल्या आवड़ीसाठी,
आपण उगाचच आयुष्य दवडतो…

काट्यात अडकलेला पदर,
अलगद सोडवून घेता येतो.
तुझ्यात गुंतलेलं मन मात्र,
सोडवता सोडवता गुंता होतो…

मलाच माहीत नसलेलं एक दुःख,
माझ्या मनात साठून आहे.
बरेचदा मी विचार करतो,
नक्की याचा ओघ कुठून आहे…

एक वेड फुलपाखरु,
एका फुलावरुन दुसऱ्या फुलावर उडायच.
थोडासा गोडवा सोधण्याच्या नादात,
वेड जगभर फिरायच…

Indian mentality screwed… Best one…

शादी हुई …

दोनों बहुत खुश थे!
स्टेज पर फोटो सेशन शुरू हुआ!
दूल्हे ने अपने दोस्तों का परिचय साथ खड़ी अपनी साली से करवाया
” ये है मेरी साली , आधी घरवाली ”
दोस्त ठहाका मारकर हंस दिए !

दुल्हन मुस्कुराई और अपने देवर का परिचय अपनी सहेलियो से करवाया
” ये हैं मेरे देवर ..आधे पति परमेश्वर ”
ये क्या हुआ ….?
अविश्वसनीय …अकल्पनीय!

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जो न मिल सका वह बेवफा, यह अजीब सी बात है.. जो चला गया मुझे छोडकर, वह आज भी साथ है…

90′s ka doordarshan aur hum

Door Darshan

90 का दूरदर्शन और हम

1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर टीवी के सामने बैठ जाना
2.”रंगोली”में शुरू में पुराने फिर नए गानों का इंतज़ार करना
3.”जंगल-बुक”देखने के लिए जिन दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका घर पर आना
4.”चंद्रकांता”की कास्टिंग से ले कर अंत तक देखना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को फिल्मों का इंतजार करना
7.किसी नेता के मरने पर कोई सीरियल ना आए तो उस नेता को और गालियाँ देना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने निकल जाना
9.”मूक-बधिर”समाचार में टीवी एंकर के इशारों की नक़ल करना
10.कभी हवा से ऐन्टेना घूम जाये तो छत पर जा कर ठीक करना

बचपन वाला वो ‘रविवार’ अब नहीं आता,
दोस्त पर अब वो प्यार नहीं आता।

जब वो कहता था तो निकल पड़ते थे
बिना घडी देखे,
अब घडी में वो समय वो वार नहीं आता।
बचपन वाला वो ‘रविवार’ अब नहीं आता…।।।

वो साईकिल अब भी मुझे बहुत याद आती है,
जिसपे मैं उसके पीछे बैठ कर खुश हो जाया करता था।
अब कार में भी वो आराम नहीं आता…।।।
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